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फड़ पेंटिंग: जब दीवार चलती-फिरती कहानी बन जाए

Phad painting: jab deewar chalti phirti kahani ban jaye

फड़ चित्रकला में कपड़े की लंबी चादर पर लोक देवताओं की कथा सजती है। राजस्थान के गाँवों में भोपे इस फड़ को साथ ले जाते थे, गाते भी थे और लोगों को कहानी भी सुनाते थे। इसलिए इसे चलती-फिरती मंदिर-जैसी जगह माना गया। पाबूजी की फड़ आम तौर पर 15 फुट और देव नारायण की फड़ लगभग 30 फुट तक होती है। रंग पहले सब्जियों और पौधों से बनते थे, इसलिए उनमें मिट्टी और देसी गंध-सी महसूस होती है। यह कला सिर्फ दीवार का चित्र नहीं, याद, आस्था और गाँव की बोली का सफर है। घणी सच्ची बात, इसमें हर रेखा एक गाथा बोलती है।

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