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कॉमिक कविComic Kavi

प्याज़ कचौरी का पहला क्रंच

Pyaaz kachori ka pehla crunch

सर्द सुबह, कचौरी का ठेला और प्याज़ की खुशबू—जयपुर में ये तीन चीज़ें मिल जाएँ तो दिन तय। पहला कौर आते ही जो खट्टा-मीठा मसाला जीभ पर चढ़ता है, उसका असर सीधे चेहरे पर दिखता है। ठेला वाला भी धीरे से देख लेता है; उसकी वह आत्मविश्वासी मुस्कान बता देती है कि अब ग्राहक लौटकर आएगा। और सच्ची, लौटकर आता भी है। दूसरे कौर पर वह तेज कुरकुरा खोल और गरम प्याज़ का मेल और पकड़ लेता है। म्हारे जयपुर में कचौरी सिर्फ नाश्ता नहीं, एक छोटी सी आदत है—जिसे ठेला वाला बिना बोले पहचान लेता है। प्याज़ कचौरी का रहस्य स्वाद में कम, और उस एक जान-पहचान वाली मुस्कान में ज़्यादा है.

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