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कॉमिक कविComic Kavi

प्याज़ कचौरी का पहला काटा

Pyaaz kachori ka pehla kaata

सुबह की गली हो या शाम का चौराहा, जयपुर की प्याज़ कचौरी का मिज़ाज अलग ही होता है। बाहर से गोल, भीतर से चुस्ट प्याज़-मसाला, और ऊपर से ऐसा कुरकुरापन कि सुनते ही मन खुश हो जाए। पर पहला कौर ही असली खेल शुरू करता है: भरावन कभी एक तरफ़ निकलती है, कभी तेल उँगलियों तक पहुँच जाता है, और पेपर प्लेट हार मान लेती है। घणी जल्दी में काम नहीं चलता, प्याज़ कचौरी को थोड़ा समय और थोड़ा सब्र चाहिए। जयपुर वाले भी जानते हैं—यह नाश्ता नहीं, एक छोटा सा इम्तिहान है। और सच्ची बात, जो इस इम्तिहान में मुस्कुराते हुए निकल जाए, वही असली कचौरी-प्रेमी है.

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