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कॉमिक कविComic Kavi

प्याज कचोरी के बाद चाय: रीसेट बटन

Pyaaz kachori ke baad chai reset button

प्याज कचोरी का मामला जयपुर में सीधा है: प्लेट में गरम, तेल की हल्की चमक, और बगल में गिलास में कटिंग चाय। पहला कौर लेते ही लगता है पेट ने हाथ खड़े कर दिए — बस, अब और नहीं। पर चाय का धुआँ उठता है, और आदमी खुद बोल पड़ता है, चलो एक घूँट और। सड़क किनारे की दुकान पर यही छोटी-सी जादूगरी होती है। कचोरी से जो थोड़ा तीखा झटका मिलता है, चाय उसे संभाल लेती है। म्हारे जयपुर में इसे खाना नहीं, छोटी-सी व्यवस्था फिर से शुरू होना कहना चाहिए। घणी सच्ची जोड़ी है भाया — एक कौर में खत्म, और अगले ही पल फिर से लाइन, फिर से बात, फिर से हँसी।

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