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कॉमिक कविComic Kavi

रावत की कचौरी और कतार का ज्ञान

Rawat ki kachori aur queue ka gyaan

रावत की दुकान के बाहर सुबह से ही कतार लग जाती है। कोई कार्यालय जा रहा है, कोई स्कूल से पहले नाश्ता ले रहा है, और कोई बस इस उम्मीद में खड़ा है कि आज कचौरी गरम मिलेगी। जयपुर में इंतज़ार करना आदमी को ग़ुस्से से ज़्यादा समझदार बना देता है। पहले पाँच मिनट में सब फ़ोन देखते हैं। दस मिनट बाद सब आपस में भाई-साहब बन जाते हैं। फिर ख़ुशबू आती है, और धैर्य की असली परीक्षा शुरू। घणी सच्ची बात यह है: कतार में खड़े होकर ही पता चलता है कि सब्र का साथ चटनी से भी अच्छा लगता है। और जो 12 मिनट का इंतज़ार होता है, वही निकलते वक़्त सबसे मीठा लगता है।

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