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कॉमिक कविComic Kavi

सांगानेर की छोटी बूँद, बड़ी छेड़-छाड़

Sanganer ki chhoti boond, badi chhed-chaad

सांगानेर के हाथ से छपे कपड़े देखकर लगता है, डिज़ाइन नहीं, धुन चल रही हो। एक फूल, एक बेल, एक छोटा सा दाना — और सब बराबर दूरी पर, जैसे प्रिंटर ने दिल से नहीं, टाइमर से मोहब्बत की हो। यही जयपुर की आदत है: दोहराव, लय, और थोड़ी सी नखराली सफ़ाई। बाज़ारों में यह कपड़ा पान के लाल रंग के साथ और भी जीवंत लगता है। कारीगर के हाथ की थप-थप, सूखते रंग की महक, और छोटी सी गलती को भी “कला” बना देने का अंदाज़ — घणी कमाल की बात है। सांगानेर का प्रिंट बस कपड़ा नहीं, एक छोटा सा मज़ाक है जो बड़े सलीके से बार-बार खिलता रहता है।