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कॉमिक कविComic Kavi

शादी का डीजे और नींद की जंग

Shaadi ka DJ aur neend ki jung

शादी के मौसम में जयपुर की गलियों में एक नया हुक्म चल पड़ता है: डीजे का मात्रा और नींद का हिसाब। पहले लगता है बस दो गाने होंगे, पर भाईसाहब, रात बढ़ते-बढ़ते छत की दीवार भी थिरकने लगती है। नींद में आधा सपना, आधा भारी संगीत—और म्हारे घर में सबसे पहले आँख खोलने वाले होते हैं बच्चे और दही-जलेबी का इंतज़ार करने वाले बुज़ुर्ग। गली के कोने पर बैंड-बाजा, बीच में डीजे, और ऊपर से किसी चाची का कहना, “बस एक गाना और।” वह एक गाना अक्सर 3 बजे तक पहुँच जाता है। जयपुर का प्यार भी अलग, और जयपुर की नींद की लड़ाई भी अलग। सच्ची बात बस इतनी: शादी याद रह जाती है, पर डीजे का भारी संगीत तो सुबह तक तकिए में घूमता रहता है।