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आज की जयपुरAaj Ki Jaipur

शाम का पान अड्डा, जयपुर की धीमी बात

Shaam ka paan adda, Jaipur ki dheemi baat

शाम होते ही चौराहों के पास पान की दुकान एक छोटा सा अड्डा बन जाती है। कोई कार्यालय से लौटा, कोई स्कूल के गेट से, कोई बस पैर फैलाकर खड़ा। पान वाला पत्ते को साफ करता है, मीठा मसाला रखता है, और गुटखे की माँग भी बिना ज़्यादा बोले समझ लेता है। घणी सी गरमाहट के बीच यहाँ बात तेज नहीं, धीमी चलती है। मोहल्ला, क्रिकेट, बाज़ार, घर की छोटी टेंशन — सब एक पान के साथ घुल जाते हैं। जयपुर की शाम का यह रंग कोई शोर नहीं करता, बस चुपचाप टिकता है। और सबसे बड़ा संकेत? वह आदमी, जो रोज एक मीठा पान लेकर अपनी कुर्सी पर आता है, आज बिना बोले दूसरा पान भी ले गया।