सिग्नल पर कचोरी, सब्र का असली टेस्ट
सिग्नल के कोने पर खड़ी प्याज़ की कचोरी जयपुर का छोटा सा इम्तिहान है। बाहर से खस्ता, अंदर से गरम प्याज़ और मसाले का धमाका; पहला बाइट लेते ही ज़ुबान बोलती है, “घणी जल्दी कर दी।” फिर धनिया की चटनी मीठी-तीखी हो कर सब कुछ और तेज़ कर देती है। मी रोड हो या राजा पार्क का कोना, लाल बत्ती के नीचे यह दृश्य रोज़ दिखता है: एक हाथ स्टेयरिंग पर, एक हाथ पैकेट पर। और जब भरावन ज़ुबान जला दे, तब भी चेहरे पर जो मुस्कान आती है, वही जयपुर वाली बात है। सब्र भी, स्वाद भी — और सिग्नल खुलने से पहले पैकेट खत्म करने का पूरा प्लान।
